आज मेरे मन में एक विचार कौंधा , जिसने मेरे जेहन को अन्दर तक हिला दिया !!
फांसी !!!!
""plz मुझे छोड़ दो ! मुझे माफ़ कर दो! मुझे यह सजा मत दो !!!!!""
मैं जिंदगी भर मानवसेवा करूंगा . मेरा यह अपराध मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा गुनाह था ,जो मै क्रोध और विवशता में कर दिया था ,जिसका मुझे बहुत पछतावा है .मैं अब बदल गया हूँ ,""
क्या यही शब्द निकलते होंगे उस अपराधी के मुंह से जिसके कदमों की दूरी फांसी के तख्ते से महज़ कुछ मीटर होती होगी .
उसके दिल का दर्द और अपराध बोध की सीमा क्या होती होगी !!!???
क्या छलकते होंगे उसके आँखों से आंसू ,जब लगता होगा उसे की अब खत्म हो जाएगी जिंदगी मेरी .
शायद दुनिया में वो इंसान ऐसा होगा जो जानता होगा अपनी मौत का समय व तारीख .
दिल दहलता होगा उसका यह सोच कर की एक ही झटके में प्राण पखेरू उड़ जायेंगे ....
और क्यों न दहले ? एक झटका तो कहने की बात है ,कुछ मिनट तो जरुर लगते होंगे प्राण निकलने में , और उस समय की तड़प के बारे में सोच सोच कर आंसू भर जाते होंगे ,हाथ पैर कांपते होंगे ! कितना भयानक होता होगा उसका वह समय ........
फांसी से पहले भी तो अन्धकार में डाल दिया जाता है अपराधी को , जब काले कपडे से मुंह ढका जाता है उसका. . तब भी तो घुटन होती ही होगी ना
भले ही दुनिया का सबसे शातिर अपराधी हो वह ,लेकिन उस समय बन जाता है दुनिया का सबसे असहाय व्यक्ति . चाहे उसने किया हो बहुत ही जघन्य पाप ,पर उसकी अपराध बोध की सीमा और तड़प जो फांसी मिलने से कुछ समय पहले उसके जेहन में होती होगी ,उसे बस वही जान सकता है .
कितना पश्चाताप होता होगा उसे अपने कृत्य पे ,जिसने उसे आज असमय ही मौत के सामने खड़ा कर दिया .
धडाक s ...s ....s ..s ....s ..s . .......एक पल की तड़पडाहट और जिंदगी का अंत !!!
पीछे रह जाते है कुछ सवाल ............
क्या इसी लिए पैदा होते है अपराधी ...........?
क्यों बनाता है भगवान् इन्हें अपराधी .................?
आखिर क्यों किया इसने ये कुकृत्य ..........................................?
और इन सवालों के साथ रह जाता है बस ....................................................."शून्य"......................................................
